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भारत में संपत्ति के अधिकार की क्या स्थिति है?

Aकेवल नागरिकों के लिए उपलब्ध विधिक अधिकार
Bकिसी भी व्यक्ति के लिए उपलब्ध विधिक अधिकार
Cकेवल नागरिकों के लिए उपलब्ध मौलिक अधिकार
Dन तो मौलिक अधिकार और न ही विधिक अधिकार
Answer & Solution
Correct answer: B. किसी भी व्यक्ति के लिए उपलब्ध विधिक अधिकार
उत्तर: B. संपत्ति का अधिकार किसी भी व्यक्ति के लिए उपलब्ध एक विधिक (कानूनी) अधिकार है। मूल 1950 के संविधान के तहत: - संपत्ति का अधिकार अनुच्छेद 19(1)(f) — संपत्ति का अर्जन, उसे धारण करने और उसका व्ययन करने का अधिकार — तथा अनुच्छेद 31 — मुआवजे के बिना संपत्ति से वंचित करने के विरुद्ध संरक्षण — के तहत एक मौलिक अधिकार था। - इसके कारण भूमि सुधारों, राष्ट्रीयकरण और समाजवादी कानूनों के साथ लगातार टकराव हुआ। कई अदालती लड़ाइयाँ हुईं (कामेश्वर सिंह, बेला बनर्जी, गोलकनाथ आदि)। 44वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 (जनता सरकार, मोरारजी देसाई के अधीन): - इसने भाग III (मौलिक अधिकार) से अनुच्छेद 19(1)(f) और अनुच्छेद 31 को हटा दिया। - भाग XII में एक नया अनुच्छेद 300A जोड़ा: 'किसी व्यक्ति को उसकी संपत्ति से विधि के प्राधिकार के बिना वंचित नहीं किया जाएगा।' संपत्ति के अधिकार की वर्तमान स्थिति: - यह अब अनुच्छेद 300A के तहत एक संवैधानिक विधिक अधिकार है (मौलिक अधिकार नहीं)। - यह 'किसी भी व्यक्ति' (केवल नागरिकों के लिए नहीं) के लिए उपलब्ध है — 'व्यक्ति' शब्द में नागरिक और गैर-नागरिक दोनों शामिल हैं, साथ ही विधिक व्यक्ति (कंपनियां, ट्रस्ट) भी शामिल हैं। विदेशी नागरिक और संस्थाएं भी इस संरक्षण का लाभ उठाते हैं। - संपत्ति से वंचित केवल विधि के प्राधिकार द्वारा ही किया जाना चाहिए कानून वैध होना चाहिए और निर्धारित प्रक्रिया का पालन होना चाहिए। - इसका प्रवर्तन सामान्य न्यायालयों/अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालयों में रिट के माध्यम से होता है (सर्वोच्च न्यायालय में अनुच्छेद 32 के तहत सीधे नहीं, क्योंकि यह मौलिक अधिकार नहीं है)। अतः विकल्प B इसे सही ढंग से व्यक्त करता है: विधिक अधिकार, जो किसी भी व्यक्ति के लिए उपलब्ध है। अन्य विकल्प क्यों गलत हैं: (A) 'केवल नागरिकों के लिए' — गलत अनुच्छेद 300A में 'कोई व्यक्ति' लिखा है, 'कोई नागरिक' नहीं। (C) 'केवल नागरिकों के लिए उपलब्ध मौलिक अधिकार' — गलत 44वें संशोधन 1978 के बाद यह मौलिक अधिकार नहीं रहा। (D) 'न तो मौलिक अधिकार और न ही विधिक अधिकार' — गलत यह संवैधानिक रूप से संरक्षित एक विधिक अधिकार है। स्रोत: भारत का संविधान अनुच्छेद 300A / 44वां संविधान संशोधन अधिनियम 1978 / मेनका गांधी बनाम भारत संघ (1978)।
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