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प्राचीन भारत के इतिहास के संदर्भ में, भवभूति, हस्तिमल्ल और क्षेमेश्वर प्रसिद्ध थे

Aजैन भिक्षु
Bनाटककार
Cमंदिर वास्तुकार
Dदार्शनिक
Answer & Solution
Correct answer: B. नाटककार
उत्तर: B. भवभूति, हस्तिमल्ल और क्षेमेश्वर प्रसिद्ध नाटककार (संस्कृत नाटककार) थे। भवभूति (8वीं शताब्दी ईस्वी) — कालिदास के बाद सबसे महान संस्कृत नाटककारों में से एक। उन्हें कन्नौज के राजा यशोवर्मन का संरक्षण प्राप्त था। उनके तीन प्रसिद्ध नाटक हैं: - मालतीमाधव — प्रेम और शृंगार पर आधारित एक प्रकरण। - महावीरचरित — राज्याभिषेक तक राम के प्रारंभिक जीवन पर आधारित। - उत्तररामचरित — लंका युद्ध के बाद राम का उत्तर जीवन, जिसे उनकी उत्कृष्ट कृति माना जाता है। भवभूति को उनकी उच्च कोटि की संस्कृत, गहन भावनात्मक अभिव्यक्ति (विशेषकर करुण रस) और नाट्य शिल्प के लिए जाना जाता है। हस्तिमल्ल — 13वीं शताब्दी के एक जैन संस्कृत नाटककार, जिन्होंने जैन विषयों पर नाटक लिखे। उनकी कृतियों में 'विक्रांतकौरव', 'मैथिलीकल्याण', 'सुभद्राहरण' और 'अंजना पवनांजय' शामिल हैं। उन्होंने होयसल-यादव दरबार में सेवा की। क्षेमेश्वर — 11वीं शताब्दी के कश्मीरी संस्कृत नाटककार। वे 'चंडकौशिक' (हरिश्चंद्र की कथा पर आधारित एक संस्कृत नाटक) और 'नैषधानंद' (नल की कथा पर आधारित) के रचयिता हैं। उनके नाटक पौराणिक राजाओं के कष्टों और नैतिक परीक्षाओं की पड़ताल करते हैं। ये सभी व्यक्तित्व संस्कृत नाट्यशास्त्र की उस समृद्ध परंपरा से संबंधित हैं जिसमें भास, शूद्रक, कालिदास, हर्ष, भट्ट नारायण, विशाखदत्त आदि शामिल हैं। अन्य विकल्प: (A) जैन भिक्षु — नहीं, केवल हस्तिमल्ल ने जैन विषयों पर लिखा था, किंतु तीनों नाटककार हैं। (C) मंदिर वास्तुकार — गलत; उस युग के वास्तुकारों में भोजदेव, सूत्रधार मंडन जैसे व्यक्तित्व शामिल हैं। (D) दार्शनिक — गलत; यह उपाधि शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, विद्यारण्य आदि का वर्णन करती है। स्रोत: पाठ्यचर्या भारतीय इतिहास के कुछ विषय / ए.बी. कीथ, 'द संस्कृत ड्रामा'।
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