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भारतीय इतिहास के संदर्भ में, निम्नलिखित में से किन्हें "कुलाह-दारन" कहा जाता था?

Aअरब व्यापारी
Bकलंदर
Cफारसी सुलेखक (कैलिग्राफिस्ट)
Dसैयद
Answer & Solution
Correct answer: D. सैयद
उत्तर: D. मध्यकालीन भारतीय इतिहास में 'कुलाह-दारन' सैयदों को कहा जाता था। फारसी में 'कुलाह-दारन' का शाब्दिक अर्थ 'टोपी पहनने वाले' होता है। यह मध्यकालीन (दिल्ली सल्तनत और उसके बाद के) प्रशासनिक और सामाजिक संदर्भों में सैयदों — जो पैगंबर मुहम्मद की बेटी फातिमा और दामाद अली के वंशज थे — के लिए प्रयुक्त होने वाला एक पदनाम था। सैयद आमतौर पर अपने वंश के प्रतीक के रूप में एक विशिष्ट टोपी (कुलाह) पहनते थे, जो प्रायः हरे रंग की होती थी। दिल्ली सल्तनत काल में, सैयद चार प्रमुख कुलीन वर्गों (अफगान, तुर्क और फारसियों के साथ) में से एक थे। उन्हें प्राथमिकता, धार्मिक सम्मान प्राप्त था, और वे अक्सर महत्वपूर्ण प्रशासनिक/धार्मिक पदों पर आसीन होते थे। सैयद वंश (1414-1451) ने तुगलकों और लोदियों के बीच दिल्ली पर संक्षिप्त शासन किया था। अन्य विकल्प: (A) अरब व्यापारियों को आमतौर पर 'बोहरा' या विशिष्ट सामुदायिक नाम दिए जाते थे। (B) कलंदर घुमक्कड़ सूफी फकीरों का एक वर्ग था, जो सैयदों से अलग था। (C) फारसी सुलेखकों के लिए अलग शब्दावली थी। स्रोत: पाठ्यचर्या भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II / सल्तनत कालीन समाज पर मध्यकालीन फारसी स्रोत।
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