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मध्यकालीन भारत में, शब्द "फणम" (फनम) किसे निर्दिष्ट करता था?

Aपहनावा (वस्त्र)
Bसिक्के
Cआभूषण
Dहथियार
Answer & Solution
Correct answer: B. सिक्के
उत्तर: B. मध्यकालीन भारत में, 'फणम' (फनम) सिक्कों को निर्दिष्ट करता था। फणम (तमिल में फनम, पनम, पणम भी कहा जाता है) सोने या चाँदी का एक छोटा सिक्का था जो 9वीं से 19वीं शताब्दी के बीच दक्षिण भारत में व्यापक रूप से प्रचलित था। मूल रूप से चोल, पांड्य और विजयनगर साम्राज्यों द्वारा, और बाद में मैसूर के वोडेयार, तंजौर और मदुरै के नायक तथा यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों द्वारा इसे ढाला गया था। फणम छोटी लेकिन मूल्यवान इकाइयाँ थीं, जिनका उपयोग दैनिक लेन-देन के लिए किया जाता था। इसके विभिन्न मूल्यवर्ग मौजूद थे: चुक्रम (त्रावणकोर में), कासू (तांबे का छोटा मूल्यवर्ग), और ये पैगोडा या हून जैसे बड़े सिक्कों के उप-गुणक (सब-मल्टीपल) थे। अन्य विकल्प: (A) पहनावा — फणम का वस्त्रों से कोई संबंध नहीं है। (C) आभूषण — गहनों के लिए अलग शब्दों का प्रयोग किया जाता था। (D) हथियार — मध्यकालीन दक्षिण भारतीय सेनाओं में इसके लिए अलग शब्दावली थी। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने भी फणम के सिक्के ढाले थे। 17वीं-18वीं शताब्दी के मद्रास प्रेसीडेंसी ने व्यापार में पैगोडा और रुपये के साथ फणम का इस्तेमाल किया था। स्रोत: पाठ्यचर्या हमारे अतीत II / दक्षिण भारत का मुद्राशास्त्रीय (न्यूमिस्मैटिक) अध्ययन।
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