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“मियावाकी पद्धति” (Miyawaki method) किसके लिए जानी जाती है?

Aशुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देने के लिए
Bआनुवंशिक रूप से संशोधित वनस्पतियों का उपयोग करके उद्यानों के विकास के लिए
Cशहरी क्षेत्रों में लघु वनों (मिनी फॉरेस्ट) के निर्माण के लिए
Dतटीय क्षेत्रों और समुद्र की सतह पर पवन ऊर्जा के दोहन के लिए
Answer & Solution
Correct answer: C. शहरी क्षेत्रों में लघु वनों (मिनी फॉरेस्ट) के निर्माण के लिए
उत्तर: C. मियावाकी पद्धति शहरी क्षेत्रों में लघु वनों के निर्माण के लिए जानी जाती है। मियावाकी पद्धति (MIYAWAKI METHOD) 1970 के दशक में जापानी वनस्पतिशास्त्री डॉ. अकीरा मियावाकी (DR AKIRA MIYAWAKI) द्वारा विकसित की गई थी। यह कुछ ही दशकों के भीतर छोटे शहरी भूखंडों पर देशी बहुस्तरीय वनों की स्थापना करने की एक तकनीक है। प्रमुख विशेषताएँ: - केवल देशी प्रजातियों का उपयोग (कोई विदेशी पौधे नहीं) - प्रति वर्ग मीटर 3-5 पौधों का सघन रोपण - वनस्पति की 4 परतों का उपयोग: झाड़ियाँ, उप-वृक्ष, वृक्ष और वितान (कैनोपी) वृक्ष - ज़मीन पर अत्यधिक मल्चिंग; न्यूनतम 1 मीटर मिट्टी की तैयारी - पारंपरिक वृक्षारोपण की तुलना में वन 10 गुना तेजी से बढ़ता है - 2-3 वर्षों के बाद आत्मनिर्भर हो जाता है भारत भर में गैर-सरकारी संगठनों (NGOs), नगर पालिकाओं और SayTrees, Afforestt द्वारा तथा तमिलनाडु / महाराष्ट्र / कर्नाटक के सार्वजनिक स्थलों पर 1,700 से अधिक स्थानों पर मियावाकी वन लगाए गए हैं। बेंगलुरु, चेन्नई और मुंबई में कई मियावाकी स्थल हैं। अन्य विकल्प गलत हैं: (A) शुष्क व्यावसायिक खेती में ड्रिप सिंचाई और उन्नत बीजों का उपयोग होता है। (B) जीएमओ उद्यानों का मियावाकी से कोई संबंध नहीं है। (D) अपतटीय पवन ऊर्जा इससे असंबद्ध है। स्रोत: पर्यावरण मंत्रालय / वन विभाग राज्य वृक्षारोपण रिपोर्ट।
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